अपना सॉइल हेल्थ कार्ड कैसे पढ़ें और खाद की सही योजना बनाएँ
SHC की लाइन-दर-लाइन समझ: pH, NPK, सूक्ष्म पोषक — और इन नंबरों को यूरिया, DAP, MOP की असली बोरियों में कैसे बदलें।
ज़्यादातर किसानों के पास सॉइल हेल्थ कार्ड किसी ड्रॉवर में पड़ा है। निकाल लें, तो यह सोने की खान है — पढ़ना आना चाहिए।
कार्ड पर क्या लिखा होता है
कार्ड पर 12 जानकारियाँ होती हैं। सबसे ज़रूरी पाँच: pH (क्षारीयता), Organic Carbon (मिट्टी की जान), उपलब्ध नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), और पोटाश (K)। बाकी — सल्फर, जिंक, बोरॉन, आयरन, कॉपर, मैंगनीज़ — विशेष फसलों के लिए ज़रूरी होते हैं।
pH 6.5 से नीचे या 8.0 से ऊपर है तो कितनी भी यूरिया डालिए — काम नहीं करेगी। पहले चूना या जिप्सम से ठीक कीजिए। Organic Carbon 0.5% से कम हो तो मिट्टी को कम्पोस्ट या गोबर चाहिए, केमिकल नहीं।
नंबरों को बोरियों में बदलिए
हर फसल की प्रति एकड़ NPK मात्रा तय है — मिसाल कपास को 60:30:30 (N:P:K kg/एकड़) चाहिए। अगर आपकी मिट्टी में पहले से 45 kg N है, तो आपको खाद से सिर्फ़ 15 kg देना है — यानी एक तिहाई बोरी यूरिया, पूरी नहीं।
P और K मिट्टी में धीरे चलते हैं। अगर कार्ड में 'High' दिख रहा हो, तो दो मौसम तक DAP और MOP 25-50% कम कर सकते हैं।
जो ग़लतियाँ पैसे खाती हैं
एक: पुराने कार्ड पर भरोसा। हर 2-3 साल में दोबारा टेस्ट कराइए। दो: सूखी ज़मीन पर यूरिया — आधे से ज़्यादा उड़ जाती है। डालने के 12 घंटे में पानी ज़रूर दें।
तीन: सूक्ष्म पोषकों को नज़रअंदाज़ करना। ₹40 का जिंक स्प्रे अक्सर ₹400 की एक्स्ट्रा यूरिया से बेहतर काम करता है।





